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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...

 

‘‘अगर तुम किसी के लिए अच्छा नहीं कह सकते, तो कुछ भी मत कहना...’’ अज्ञात-काया में जाने किस तरह की रोशनी होती है। इन दिनों कथाकार की ज़िंदगी अधलिखी पंक्तियों जैसी है। उसके सपनों की ज़मीन पर अनहोनी की

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12 फरवरी 2026

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