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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

01 मई 2024

‘जेएनयू क्लासरूम के क़िस्से’

‘जेएनयू क्लासरूम के क़िस्से’

जेएनयू द्वारा आयोजित वर्ष 2012 की (एम.ए. हिंदी) प्रवेश परीक्षा के परिणाम में हर साल की तरह छोटे गाँव और क़स्बे इस दुर्लभ टापू की शांति भंग करने के लिए घुस आए थे। हमारी क्लास एलएसआर और मिरांडा हाउस जैसे

27 अप्रैल 2024

समॉरा का क़ैदी

27 अप्रैल 2024

समॉरा का क़ैदी

‘समारा का क़ैदी’ एक प्राचीन अरबी कहानी है। इस कहानी का आधुनिक रूपांतरण सोमरसेट मौ'म ‘अपॉइंटमेंट इन स्मारा’ (1933) नाम से कर चुके हैं। यहाँ इस कहानी का चित्रकथात्मक रूपांतरण कर रहे—अविरल कुमार और मैना

26 अप्रैल 2024

पिता के बारे में

पिता के बारे में

पिता का जाना पिता के जाने जैसा ही होता है, जबकि यह पता होता है कि सभी को एक दिन जाना ही होता है फिर भी ख़ाली जगह भरने हम सब दौड़ते हैं—अपनी-अपनी जगहों को ख़ाली कर एक दूसरी ख़ाली जगह को देखने। वह जगह

25 अप्रैल 2024

नाऊन चाची जो ग़ायब हो गईं

नाऊन चाची जो ग़ायब हो गईं

वह सावन की कोई दुपहरी थी। मैं अपने पैतृक आवास की छत पर चाय का प्याला थामे सड़क पर आते-जाते लोगों और गाड़ियों के कोलाहल को देख रही थी। मैं सोच ही रही थी कि बहुत दिन हो गए, नाऊन चाची की कोई खोज-ख़बर नहीं

23 अप्रैल 2024

'झीनी बीनी चदरिया' का बनारस

'झीनी बीनी चदरिया' का बनारस

एक शहर में कितने शहर होते हैं, और उन कितने शहरों की कितनी कहानियाँ? वाराणसी, बनारस या काशी की लोकप्रिय छवि विश्वनाथ मंदिर, प्राचीन गुरुकुल शिक्षा के पुनरुत्थान स्वरूप बनाया गया बनारस हिंदू विश्वविद्य

22 अप्रैल 2024

शुद्ध भाषा किस चिड़िया का नाम है?

शुद्ध भाषा किस चिड़िया का नाम है?

कुछ मित्र अक्सर हिंदी में प्रूफ़ रीडिंग की दुर्गति पर विचार करते रहते हैं। ऐसे में अचानक थोड़ी पुरानी बात याद आ गई। मैं एक बार हिंदी के एक बड़े लेखक के घर बैठा हुआ था। मैंने बातों-बातों में ही ख़र्च

17 अप्रैल 2024

सौ बार मंच पर उतर चुकी एक कविता के बारे में

सौ बार मंच पर उतर चुकी एक कविता के बारे में

एक भाषा में कालजयी महत्त्व प्राप्त कर चुकीं साहित्यिक कृतियों के पुनर्पाठ के लिए केवल समालोचना पर निर्भर रहना एक तरह की अकर्मठता और पिछड़ेपन का प्रतीक है। यह निर्भरता तब और भी अनावश्यक है जब आलोचना-पद

16 अप्रैल 2024

नवगीत का सूरज डूब गया

नवगीत का सूरज डूब गया

माहेश्वर तिवारी [1939-2024]—एक भरा-पूरा नवगीत नेपथ्य में चला गया—अपनी कभी न ख़त्म होने वाली गूँज छोड़कर। एक किरन अकेली पर्वत पार चली गई। एक उनका होना, सचमुच क्या-क्या नहीं था! उन्हें रेत के स्वप्न आते

14 अप्रैल 2024

बंगाली, बैशाख और रवींद्रनाथ

बंगाली, बैशाख और रवींद्रनाथ

बांग्ला नव वर्ष का पहला वैशाख वास्तव में बंगालियों के प्राणों का उत्सव है। इस उत्सव में कोई विदेशीपन नहीं है; बल्कि इसमें बंगाली परंपरा, आत्म-परिचय और संस्कृति है। इस दिन नए परिधान में, नए साज में, र

14 अप्रैल 2024

लोग क्यों पढ़ते हैं अंबेडकर को?

लोग क्यों पढ़ते हैं अंबेडकर को?

यह सन् 2000 की बात है। मैं साकेत कॉलेज, अयोध्या में स्नातक द्वितीय वर्ष का छात्र था। कॉलेज के बग़ल में ही रानोपाली रेलवे क्रॉसिंग के पास चाय की एक दुकान पर कुछ छात्र ‘क़स्बाई अंदाज़’ में आरक्षण को लेकर